Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
दीपावली अर्चना मंडलोई रंग-रोगन और पुताई घर-घर में हुई खूब सफाई आंगन-द्वार अल्पना सजाई। देखो-देखो दीपावली आई।। बाजारों में रौनक छाई, रंग-बिरंगी झालर स…
Read moreहेलो दोस्तो, आज हम दिवाली त्योहार पर पर लेकर आए है कुछ खुबसूरत चंद लाइनें जो आपको पसन्द आएगी... आप सभी को हमारी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं... आज अयोध्…
Read moreराष्ट्र हित का गला घोंट कर, छेद न करना थाली में, मिट्टी वाले दीये जलाना, अबकी बार दिवाली में। देश के धन को देश में रखना, नहीं बहाना नाली में, मिट्ट…
Read more...एक दीप ऐसा जले शुभ कामना है मेरी दीप पर्व पर मित्र। लक्ष्मी शारद आप पर, बरसाती रहे इत्र... समता भाव समृद्ध हो, मन आनंद अपार। धन, वैभव…
Read moreबचपन की दिवाली पर गुलजार साहब की लिखी यह पुरानी कविता है। अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा…
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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