Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
हैलो फ्रेंड्स, आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक शानदार ग़ज़ल, जिसको लिखा है "निश्चल अजवानी गाफिल" ने, और यह आपको काफी पसंद आएगी। गजल निश्चल अ…
Read moreये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है रिश्तों की सीलन को सुखाए तो अच्छा है जो आंधियां अक्सर छप्पर उड़ाया करती हैं एक दफे मेरा अना* भी उड़ाए …
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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