Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
ये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है रिश्तों की सीलन को सुखाए तो अच्छा है जो आंधियां अक्सर छप्पर उड़ाया करती हैं एक दफे मेरा अना* भी उड़ाए …
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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