Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
दीया जलाना... जाना, फिर जाना, उस तट पर भी जाकर दीया जला आना, पर पहले अपना यह आंगन कुछ कहता है। उस उड़ते आंचल से गुड़हल की डाल बार-बार …
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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