Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
फिर हुआ ऐसा कि सब सुनसान हो गया भीड़भाड़ वाला वो रास्ता वीरान हो गया उड़ रहा वो परिंदा देख कर इस माहौल को अपने ही शहर से जैसे अनजान हो गया…
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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