Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
यह कविता छायावादी एवं रहस्यवादी काव्यधारा की प्रतिनिधि कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा रचित है। जिसका शीर्षक मैं नीर भरी दुख की बदली है। जिसमें कवयित्…
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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