नव प्रभात

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नव प्रभात




नव प्रभात
डॉ. राजीव जैन

नई शुरुआत की बेला में, 
नव संकल्पों का उजास, 
आशा की उजली रेखाएं, 
रचती मन में नव आकाश।

बीते पलों की धूल झाड़कर, 
स्मृतियों को विश्राम दें, 
भविष्य के पथ पर बढ़ते हुए, 
विश्वासों को नाम दें।

नव प्रभात की श्वेत किरणें, 
चेतना को छू जाती हैं, 
अंतरमन के सूने उपवन में, 
संभावनाएं बो जाती हैं।

जो टूटा था वह अनुभव बना, 
जो हारा था वह ज्ञान, 
हर विफलता के गर्भ से जन्मा, 
दृढ संकल्प का मान।

थकी हुई राहों पर अब फिर, 
साहस के चरण पड़ेंगे, 
मौन साधे जो स्वप्न थे अब, 
शब्दों में ढलकर निखरेंगे।

संघर्षों की कठोर शिलाओं पर, 
विश्वास लिखेंगे नाम, 
परिश्रम, धैर्य और कर्म से, 
गढ़ लेंगे अपना मुकाम।

नव संकल्प यह आज करें-
रुकना नहीं, झुकना नहीं, 
चाहे कितनी हो अंधियारी, 
हार को भी जीत बनाना है, 
यही जीवन की तैयारी।

अपने भीतर छिपी शक्ति को, 
हर दिन पहचानेंगे हम, 
स्वयं पर अडिग विश्वास रख, 
इतिहास बनाएंगे हम।

नए सपनों की देहरी पर खड़ी, 
आशा का दीप जले, 
अंधकार की हर परत को, 
आलोकित कर वह पले।

नव नई शुरुआत-नव चेतना, 
दृष्टि, नव प्रमाण, 
आज से बेहतर कल रचने का, 
यही जीवन-संधान।

जहां आशाएं थककर बैठी थीं, 
वहीं से उड़ान उठे, 
जहां भय ने सीमा खींची थी, 
साहस वहीं प्रमाण गढ़े।

थकी हुई राहों पर अब फिर, 
विश्वास के पग बढ़ेंगे, 
मौन में सोए जो स्वप्न थे, 
उद्घोष बनकर चमकेंगे।

संघर्षों की कठोर शिलाओं पर, 
कर्म लिखेगा इतिहास, 
धैर्य, श्रम और अनुशासन से, 
आकार लेगा हर प्रयास।

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