Poem
बदलाव की कोशिश है जारी...
देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
तुझ बिन बापू तुझ बिन आज ये तेरी गलियां सूनी हैं हां आज उन्नति रात चौगुनी, और दिन दूनी है पर तेरे भारत को और तरंगें, अभी भी छूनी हैं इस भार…
Read moreस्वच्छता अभियान:- 1. स्वच्छता ही सेवा है 2. सफाई से खुद को स्वच्छ बनाना है स्वच्छता से पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाना है 3. खूबसूरत होगा…
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देर रात तक करवटें बदलता है अनशन पर बैठा उत्साही बूढ़ा थकी हुई है निर्बल क…
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